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Triphala tablet uses in Hindi | दादी-नानी की बात सच थी: त्रिफला टैबलेट का विज्ञान और आयुर्वेद

19 June 2026

Triphala tablet uses in Hindi | दादी-नानी की बात सच थी: त्रिफला टैबलेट का विज्ञान और आयुर्वेद

Triphala tablet uses in Hindi | दादी-नानी की बात सच थी: त्रिफला टैबलेट का विज्ञान और आयुर्वेद

हमारे दादा-दादी रोज़ सुबह एक काम ज़रूर करते थे। हरड़, आंवला, और बहेड़ा — तीनों को मिलाकर पीते थे। उस ज़माने में उन्हें कब्ज़ नहीं होती थी, आंतों की कोई समस्या नहीं होती थी, और बुढ़ापे में भी वे फुर्तीले बने रहते थे। हमने उसे पुराने ज़माने की आदत समझकर हंस दिया, अनदेखा कर दिया। अब वही तीन फल टैबलेट के रूप में आ गए हैं। दाम ज़्यादा है, नाम अंग्रेज़ी में है — त्रिफला टैबलेट्स।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सच में काम करती है? या फिर यह नेचुरल मेडिसिन के नाम पर सिर्फ विश्वास बेचने का धंधा है? इस लेख में हम इस सवाल का ईमानदार जवाब देंगे।

त्रिफला क्या है? यह तीन फल क्यों हैं?

"त्रि" का मतलब है तीन, "फला" का मतलब है फल। तीन औषधीय गुणों वाले फलों का मेल ही त्रिफला है। ये तीनों अकेले भी काफी शक्तिशाली हैं। जब ये मिलते हैं, तो वह शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

आयुर्वेद में कहा जाता है कि इंसान के शरीर को तीन तत्व नियंत्रित करते हैं — वात, पित्त, और कफ। अगर ये तीनों संतुलन में रहें, तो शरीर स्वस्थ रहता है। अगर किसी एक की मात्रा बढ़ या घट जाए, तो बीमारी होती है।

हरड़ वात को संतुलित करती है। आंवला पित्त को ठंडा करता है। बहेड़ा कफ और अनावश्यक चर्बी को कम करता है। जब तीनों मिलते हैं, तो वे एक साथ तीनों तत्वों को संतुलित करते हैं। आयुर्वेद में इसे "त्रिदोष हर" कहा जाता है — यानी तीनों दोषों को ठीक करने वाला।

यह सिर्फ एक सिद्धांत नहीं है। आधुनिक विज्ञान ने भी इन तीनों फलों में शक्तिशाली तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि की है।

तीनों फलों की अपनी-अपनी ताकत

हरड़ — आंतों की रक्षक

हरड़ में "चेबुलिनिक एसिड" और "चेबुलैजिक एसिड" जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये आंतों की मांसपेशियों को धीरे-धीरे उत्तेजित करके आंतों की गतिविधि को नियमित करते हैं। यह तेज़ रेचक दवाइयों की तरह आंतों को ज़बरदस्ती काम पर नहीं लगाता। यह कोमलता से, स्वाभाविक रूप से काम करता है।

हरड़ में रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) गुण भी होते हैं। यह आंतों में रहने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करता है और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है।

आंवला — प्रकृति का विटामिन C बम

आपको पता है आंवले में विटामिन C की मात्रा कितनी होती है? एक आंवले में दस संतरों से भी ज़्यादा विटामिन C होता है। सिर्फ इतना ही नहीं, आंवले में "एम्ब्लिकानिन A" और "B" नाम के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं।

ये एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर में "फ्री रेडिकल्स" नाम के हानिकारक कणों को नष्ट करते हैं। यह कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है। यह आंखों के लेंस की रक्षा करता है, और मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) होने की संभावना को कम करता है।

बहेड़ा — ऊतकों को नया जीवन देने वाला

बहेड़े में "गैलिक एसिड", "एलैजिक एसिड" जैसे टैनिन पाए जाते हैं। ये आंतों की भीतरी दीवारों की सूजन को कम करते हैं। यह नसों को मज़बूत बनाता है और ऊतकों के पुनर्निर्माण में मदद करता है।

अध्ययनों के अनुसार बहेड़े में खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के गुण भी पाए जाते हैं।

शरीर के अंदर क्या होता है?

त्रिफला टैबलेट पेट में पहुंचते ही धीरे-धीरे घुलने लगती है। इसमें मौजूद टैनिन आंतों की दीवारों की सूजन को कम करना शुरू कर देते हैं।

आंतों की मांसपेशियों में "पेरिस्टॉलसिस" नाम की एक लहर जैसी गतिविधि उत्तेजित होती है। यह वही गतिविधि है जो खाने को आंतों में आगे की ओर धकेलती है। जब यह गतिविधि सही तरीके से नहीं होती, तभी कब्ज़ होती है। त्रिफला इस गतिविधि को धीरे-धीरे, स्वाभाविक रूप से नियमित करती है।

इसके साथ ही आंतों में जमा हुए विषैले पदार्थ, जिन्हें आयुर्वेद में "आम" कहा जाता है, बाहर निकलते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यही विषाक्त पदार्थों का जमाव कई बीमारियों की शुरुआत होता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि आंतों की सेहत और शरीर की समग्र सेहत के बीच गहरा संबंध है।

यह टैबलेट किसके लिए फायदेमंद है?

पुरानी कब्ज़ वाले लोगों के लिए

मुंबई में रहने वाली 42 साल की परमेश्वरी पिछले पांच साल से रोज़ रेचक (लैक्सेटिव) दवाई लिए बिना मल त्याग ही नहीं कर पाती थीं। उनका शरीर उन दवाइयों का आदी हो चुका था। डॉक्टर ने उन्हें त्रिफला टैबलेट दी। एक महीने में रेचक दवाई की ज़रूरत कम हो गई। तीन महीने में आंतों की गतिविधि स्वाभाविक रूप से नियमित हो गई।

त्रिफला का "नॉन-हैबिट फॉर्मिंग" यानी इसकी आदत न पड़ना, एक बहुत बड़ा फायदा है। सामान्य रेचक टैबलेट लंबे समय तक लेने पर आंतें उसकी आदी हो जाती हैं। त्रिफला आंतों में ऐसी निर्भरता पैदा नहीं करती।

IBS वाले लोगों के लिए

"इरिटेबल बाउल सिंड्रोम" में कभी कब्ज़ होती है, कभी दस्त — बारी-बारी से आते रहते हैं। पेट में दर्द और सूजन भी होती है। त्रिफला आंतों की दीवारों की सूजन को कम करके IBS के लक्षणों को बेहतर बनाती है।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए

कुछ अध्ययन बताते हैं कि त्रिफला में मौजूद तत्व पैंक्रियाज़ में इंसुलिन के स्राव को नियमित करने में मदद कर सकते हैं। यह सीधे तौर पर डायबिटीज़ का इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती "प्री-डायबिटीज़" स्थिति में वज़न घटाने और मेटाबॉलिज़्म को सुधारने में सहायक हो सकता है।

लेकिन डायबिटीज़ के मरीज़ों को सिर्फ त्रिफला के भरोसे अपनी अंग्रेज़ी दवाई बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर से पूछकर इसे एक अतिरिक्त सप्लीमेंट के रूप में लिया जा सकता है।

आंखों की सेहत के लिए

आंवले में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स आंखों के लेंस की रक्षा करते हैं। मोतियाबिंद आंख के लेंस में होने वाले "ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस" की वजह से होता है। विटामिन C से भरपूर आंवला उस ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है।

चूर्ण की जगह टैबलेट क्यों?

लोग कहते हैं कि त्रिफला चूर्ण घर पर बनाकर भी खाया जा सकता है। यह सच भी है। लेकिन इसका स्वाद बहुत कड़वा और कसैला होता है। रोज़ खाना कुछ लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है।

टैबलेट के रूप में दो फायदे हैं। पहला, स्वाद महसूस किए बिना निगला जा सकता है। दूसरा, सटीक मात्रा मिलती है। चूर्ण में सही मात्रा डाली गई है या नहीं, यह सवाल बना रहता है, लेकिन टैबलेट में मात्रा तय होती है।

सफर के दौरान साथ ले जाना भी टैबलेट के रूप में आसान है। पानी में घोलकर पीने की ज़रूरत नहीं, सीधे निगल सकते हैं।

सही तरीके से कैसे लें

रात के खाने के बाद, सोने से पहले लेना सबसे अच्छा रहता है। हल्के गुनगुने पानी के साथ लेने पर और भी फायदा मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार गुनगुना पानी आंतों की सफाई में मदद करता है।

रोज़ाना 500mg से 1000mg मात्रा की सलाह दी जाती है। यानी एक या दो टैबलेट।

एक से तीन महीने लेने के बाद कुछ हफ्तों का अंतराल देना चाहिए। भले ही त्रिफला "नॉन-हैबिट फॉर्मिंग" हो, लेकिन इसे साइकिल के तरीके से लेना सबसे बेहतर रहता है।

अन्य अंग्रेज़ी दवाइयों के साथ कम से कम एक घंटे का अंतर रखें। टैनिन कुछ दवाइयों के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

साइड इफेक्ट्स — जानना ज़रूरी है

ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा लेने पर दस्त हो सकते हैं। 1000mg से ज़्यादा खुद से लेने की कोशिश न करें।

शुरुआती दिनों में कुछ लोगों को शरीर में हल्की गर्मी महसूस हो सकती है। आयुर्वेद के अनुसार आंवले की तासीर थोड़ी गर्म होती है। ज़्यादा पानी पीने से यह ठीक हो जाता है।

कुछ लोगों को पेट में हल्की मरोड़ हो सकती है, जो आमतौर पर आंतों के नियमित होने का शुरुआती संकेत है। यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है।

चक्कर आना बहुत कम मामलों में होता है, और यह आमतौर पर शरीर में पानी की कमी की वजह से होता है। ज़्यादा गुनगुना पानी पीने से यह रोका जा सकता है।

किन्हें यह नहीं लेनी चाहिए?

गर्भवती महिलाओं को त्रिफला पूरी तरह से नहीं लेनी चाहिए। आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार त्रिफला नीचे की ओर वायु को उत्तेजित करती है, जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।

गंभीर दस्त या आंतों में घाव (अल्सर) होने पर इसे नहीं लेना चाहिए। जब आंतें पहले से ही कमज़ोर हों, तो उन्हें और उत्तेजित करना खतरनाक हो सकता है।

पांच साल से छोटे बच्चों को यह नहीं देनी चाहिए।

जो लोग खून पतला करने वाली दवाइयां (ब्लड थिनर्स) लेते हैं, उन्हें सावधान रहना चाहिए। विटामिन K युक्त खाद्य पदार्थों के साथ यह दवा थोड़ा असर डाल सकती है। डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

अच्छी गुणवत्ता की टैबलेट कैसे चुनें?

त्रिफला टैबलेट्स में एक समस्या है — बाज़ार में बहुत सारे घटिया गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स मौजूद हैं। हर्बल पाउडर को टैबलेट में बदलते समय गुणवत्ता बहुत मायने रखती है।

GMP सर्टिफाइड कंपनियों की टैबलेट चुनें। अगर पैकेट पर "स्टैंडर्डाइज़्ड एक्सट्रैक्ट" लिखा हो, तो वह बेहतर होती है। आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इसे जीवन भर रोज़ खा सकते हैं?

नहीं। तीन महीने लेने के बाद अंतराल देना चाहिए। अगर लंबे समय तक लेना ज़रूरी हो, तो आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

क्या यह ब्लड प्रेशर कम करती है?

सीधे तौर पर नहीं। लेकिन कोलेस्ट्रॉल कम करके और रक्त संचार को बेहतर बनाकर यह परोक्ष रूप से मदद कर सकती है।

क्या इसे दूध के साथ ले सकते हैं?

नहीं। सिर्फ गुनगुना पानी ही सबसे अच्छा रहता है।

आखिर में एक निष्पक्ष आकलन

त्रिफला टैबलेट कोई जादुई दवा नहीं है। यह हज़ार साल पुराने आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों, दोनों से साबित हुआ एक भरोसेमंद प्राकृतिक सप्लीमेंट है।

आयुर्वेद कहता है कि अगर आंतों की सेहत सही हो, तो शरीर की आधी सेहत अपने आप सही हो जाती है। आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि "गट माइक्रोबायोम" शरीर की समग्र सेहत को प्रभावित करता है।

अच्छी गुणवत्ता की टैबलेट चुनकर, सही मात्रा में, आयुर्वेदिक डॉक्टर या चिकित्सक की सलाह के साथ लेने पर त्रिफला निश्चित रूप से फायदा देती है। दादी-नानी की बात बेकार नहीं थी — उसके पीछे गहरा विज्ञान छुपा हुआ है।

References:

  1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5567597/

  2. https://www.nccih.nih.gov/health/ayurvedic-medicine-in-depth

  3. https://medlineplus.gov/constipation.html