Taurine Acetylcysteine tablet uses in Hindi | किडनी की रक्षा करता है टॉरिन एसिटाइलसिस्टीन की पूर्ण जानकारी व पूरा विवरण
रमेश की उम्र 52 साल है। दस साल से डायबिटीज़ है। दवाई लेते हैं, शुगर काबू में रखते हैं। लेकिन पिछले साल रूटीन खून की जाँच में Creatinine का स्तर थोड़ा बढ़ा हुआ निकला। डॉक्टर ने बताया — किडनी पर असर होने लगा है। तब जो दवाइयाँ दी गईं उनमें से एक थी टॉरिन और एसिटाइलसिस्टीन का कॉम्बिनेशन।
यह सिर्फ रमेश की कहानी नहीं है। डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर वाले बहुत से लोगों की किडनी धीरे-धीरे कमज़ोर होती रहती है — बिना कोई संकेत दिए। जब तक लक्षण बाहर दिखें, तब तक अंदर काफी नुकसान हो चुका होता है। ऐसे में टॉरिन एसिटाइलसिस्टीन टैबलेट क्या करती है — यहाँ बात करते हैं।
शरीर को अतिरिक्त सुरक्षा क्यों चाहिए?
हमारा शरीर रोज़ हज़ारों रासायनिक प्रक्रियाएं करता है। इस दौरान Free radicals नाम के अनचाहे अपशिष्ट बनते हैं। स्वस्थ शरीर इन्हें खुद संभाल लेता है। लेकिन डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों में ये अपशिष्ट ज़रूरत से ज़्यादा बनते हैं और शरीर उन्हें काबू नहीं कर पाता।
यह अतिरिक्त अपशिष्ट कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं। किडनी, लिवर, दिल — सबको धीरे-धीरे प्रभावित करते हैं। इसे Oxidative Stress कहते हैं। टॉरिन और एसिटाइलसिस्टीन इसी ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से लड़ने में बहुत असरदार हथियार हैं।
इस दवाई में क्या होता है?
टॉरिन हमारे शरीर में ही प्राकृतिक रूप से मौजूद एक एमिनो एसिड है। दिल, दिमाग, आँखें, किडनी — इन सब में यह भरपूर होता है। डायबिटीज़ जैसी स्थितियों में इसका स्तर कम हो जाता है। बाहर से देने पर ब्लड प्रेशर सामान्य होता है और किडनी के ऊतक सुरक्षित रहते हैं।
एसिटाइलसिस्टीन को NAC भी कहते हैं। यह साँस की दवाई के रूप में पहले देख चुके हैं। यही दवाई एक अलग मकसद से भी काम आती है। एसिटाइलसिस्टीन शरीर में ग्लूटाथायोन नाम का एक महत्वपूर्ण एंटी-ऑक्सीडेंट बनाने में मदद करती है। यह ग्लूटाथायोन लिवर से ज़हरीले पदार्थ बाहर निकालने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।
ये दोनों मिलकर कोशिका स्तर पर शरीर की रक्षा करने वाला एक मज़बूत गठबंधन बनाते हैं।
किन्हें यह दवाई चाहिए?
डायबिटीज़ से किडनी के क्षतिग्रस्त होने को Diabetic Nephropathy कहते हैं। लंबे समय तक शुगर बेकाबू रहे तो किडनी की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं। इस स्थिति में टॉरिन एसिटाइलसिस्टीन कॉम्बिनेशन उस नुकसान को और बढ़ने से रोकने में मदद करता है।
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों की किडनी पर भी खतरा होता है। उनके लिए भी यह दवाई दी जा सकती है। लिवर में ज़हरीले पदार्थ जमा होने से होने वाली समस्याओं में भी एसिटाइलसिस्टीन काम आती है, और लिवर के मरीज़ों को भी कभी-कभी यह कॉम्बिनेशन दिया जाता है।
शरीर में यह काम कैसे करता है?
टॉरिन ब्लड प्रेशर को संतुलित करता है — इसे किडनी से जोड़कर समझते हैं। ज़्यादा ब्लड प्रेशर किडनी की फिल्टर करने की क्षमता को धीरे-धीरे खत्म करता है। टॉरिन उस दबाव को कम करने में मदद करके किडनी के ऊतकों की रक्षा करता है। दिल की मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम को भी यह सहारा देता है।
एसिटाइलसिस्टीन ग्लूटाथायोन बढ़ाती है — यह शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्सीफायर है। दवाइयाँ, पर्यावरण का प्रदूषण, खाने में मौजूद हानिकारक तत्व — इन सबसे बनने वाले ज़हर को यह साफ करता है। लिवर साफ हो तो बाकी अंगों को भी फायदा पहुँचता है।
Free radicals को दोनों दवाइयाँ मिलकर हटाती हैं जिससे कोशिकाएं कम टूटती हैं और अंग लंबे समय तक ठीक से काम करते हैं।
दवाई के फायदे
किडनी के खराब होने की रफ्तार धीमी करना — यह इस दवाई का सबसे अहम फायदा है। डायबिटीज़ वाले मरीज़ों में किडनी की क्षति को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं, लेकिन उसे धीमा किया जा सकता है। यह बहुत ज़रूरी है — क्योंकि डायलिसिस की नौबत न आए या देर तक टले, इसके लिए यह मदद करती है।
दिल और नर्वस सिस्टम को भी फायदा होना इसकी अतिरिक्त खूबी है। डायबिटीज़ में दिल और नसें भी प्रभावित होती हैं। टॉरिन उस नुकसान को भी कुछ हद तक रोकने में मदद करता है।
किन बातों का ध्यान रखें?
एक बात साफ समझ लें — यह दवाई डायबिटीज़ ठीक नहीं करती। किडनी की क्षति ठीक नहीं करती। लेकिन उस क्षति को और आगे बढ़ने से रोकती है। यह एक सहायक दवाई है, मुख्य इलाज नहीं — यह समझना ज़रूरी है।
एसिटाइलसिस्टीन में गंधक जैसी महक आती है, कुछ लोगों को यह पसंद नहीं होती। इसकी वजह से दवाई बंद मत करें — इस महक से कोई नुकसान नहीं।
इस दवाई के साथ खूब पानी पीना बहुत ज़रूरी है। दिन में दो से तीन लीटर पानी पिएं तो किडनी दवाई को ठीक से काम करने देगी और ज़हरीले पदार्थ आसानी से बाहर निकलेंगे।
साइड इफेक्ट्स
ज़्यादातर लोगों को यह दवाई अच्छी तरह सहती है। कुछ को जी मिचलाना या पेट में ऐंठन हो सकती है। खाने के बाद दवाई लेने पर यह तकलीफ कम होती है। दस्त या कब्ज़ बहुत कम होती है। त्वचा पर खुजली हो तो डॉक्टर को बताएं।
ज़रूरी सावधानियाँ
अस्थमा के मरीज़ यह दवाई लेते वक्त सावधान रहें। कभी-कभी एसिटाइलसिस्टीन साँस की नली को सिकोड़ सकती है।
दूसरे एंटी-ऑक्सीडेंट सप्लिमेंट लेते हों तो डॉक्टर को बताएं। कई एंटी-ऑक्सीडेंट एक साथ लेने पर मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा हो सकती है।
एक ज़रूरी बात — खून की जाँच नियमित रूप से करवाते रहें। Creatinine और BUN जैसे किडनी की जाँच डॉक्टर के बताए अंतराल पर कराएं। इससे पता चलेगा कि दवाई असर कर रही है या नहीं।
किन्हें यह दवाई नहीं लेनी चाहिए?
इन दवाइयों में से किसी से भी एलर्जी हो तो बिल्कुल न लें। पेट का अल्सर गंभीर हो तो भी यह ठीक नहीं।
गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माँएं डॉक्टर की अनुमति के बिना न लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह डायबिटीज़ ठीक कर देगी?
नहीं। डायबिटीज़ से होने वाले किडनी के नुकसान को काबू में करने में मदद करती है, बीमारी ठीक नहीं करती। शुगर की दवाइयाँ जारी रखनी हैं।
क्या बालों के झड़ने में मदद करेगी?
एंटी-ऑक्सीडेंट होने की वजह से बाल और त्वचा की सेहत पर अप्रत्यक्ष असर हो सकता है। लेकिन सिर्फ बाल झड़ने के लिए इसे लेने की ज़रूरत नहीं — उसके लिए अलग दवाइयाँ हैं।
कितने महीने लेनी होगी?
बीमारी की गंभीरता के अनुसार एक से तीन महीने तक लिखी जाती है। खुद से बंद या जारी न करें।
अंत में
किडनी एक बार खराब हो जाए तो उसे वापस ठीक करना बहुत मुश्किल है। इसलिए खराब होने से पहले उसकी रक्षा करना ही समझदारी है। टॉरिन एसिटाइलसिस्टीन कॉम्बिनेशन उसी रक्षा में काम आने वाली एक अच्छी दवाई है।
लेकिन सिर्फ दवाई पर निर्भर न रहें। शुगर काबू में रखना, ब्लड प्रेशर सामान्य रखना, नमक कम खाना, खूब पानी पीना, कसरत करना — यह सब साथ हो तभी किडनी लंबे समय तक स्वस्थ रहेगी।
References:
https://medlineplus.gov/ency/article/000494.htm
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK534200/

