Sacubitril Valsartan tablet uses in Hindi | सैकुबिट्रिल वाल्सार्टन की पूर्ण जानकारी व पूरा विवरण
मुरुगेसन की उम्र 63 साल है। दो साल पहले दिल का दौरा पड़ा। जान तो बच गई, लेकिन दिल कमज़ोर हो गया। उसके बाद थोड़ा चलने पर साँस फूलने लगती, पैर सूज जाते, सीढ़ियाँ चढ़ना मुमकिन नहीं रहा। डॉक्टर ने बताया — दिल खून को ठीक से पंप नहीं कर पा रहा। उनकी कई दवाइयों के साथ एक नई टैबलेट जोड़ी गई — सैकुबिट्रिल वाल्सार्टन।
छह महीने बाद मुरुगेसन कुछ बेहतर महसूस कर रहे हैं। साँस फूलना कम हुआ है। घर में आज़ादी से चल-फिर सकते हैं। यह इस दवाई की कहानी है।
दिल की विफलता बहुत गंभीर स्थिति है। लेकिन सही दवाई से मरीज़ों की ज़िंदगी बेहतर हो सकती है — यह सैकुबिट्रिल वाल्सार्टन ने साबित किया है। यह दवाई क्या है और कैसे काम करती है — यहाँ समझते हैं।
दिल की विफलता है क्या?
दिल एक पंप की तरह काम करता है। खून खींचता है और पूरे शरीर में धकेलता है। जब इस पंप की ताकत कम हो जाती है तो शरीर के अंगों को पर्याप्त खून नहीं मिलता। फेफड़ों में तरल जमने लगता है, साँस लेना मुश्किल होता है। पैरों में सूजन आती है।
इसे Heart Failure कहते हैं। दिल अचानक नहीं रुकता — धीरे-धीरे कमज़ोर होता जाता है। दिल का दौरा, लंबे समय से बेकाबू ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ — ये सब दिल को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाते हैं।
सैकुबिट्रिल वाल्सार्टन किस तरह की दवाई है?
यह ARNI कहलाने वाली एक नई वर्ग की दवाई है। पहले की दिल की दवाइयों से यह अलग है। इसमें एक ही गोली में दो अलग-अलग दवाइयाँ हैं।
वाल्सार्टन ARB वर्ग की दवाई है — यानी रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने वाले हार्मोन को रोकती है। यह पहले से ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी में इस्तेमाल होती रही है।
सैकुबिट्रिल नई है। यह शरीर में मौजूद अच्छे प्रोटीन को तोड़ने वाले एंजाइम को रोकती है। ये अच्छे प्रोटीन Natriuretic peptides कहलाते हैं। ये रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करते हैं और अतिरिक्त नमक व पानी को किडनी के ज़रिए बाहर निकालते हैं — जिससे दिल पर बोझ कम होता है।
दोनों मिलकर काम करते हैं तो अकेले-अकेले देने से कहीं बेहतर असर होता है।
किन्हें यह दवाई दी जाती है?
पुरानी दिल की विफलता के मरीज़ों को, खासकर जिनमें दिल की खून पंप करने की क्षमता कम हो — उन्हें यह दवाई दी जाती है। Ejection Fraction यानी दिल की पंपिंग क्षमता 40 प्रतिशत से कम हो तो यह दवाई अक्सर लिखी जाती है।
जो मरीज़ ACE inhibitor या ARB दवाइयाँ लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहे — उनके लिए डॉक्टर इस दवाई पर स्विच करते हैं। जो मरीज़ बार-बार अस्पताल में भर्ती होते हों, उनके लिए भी यह दी जाती है।
शरीर में यह कैसे काम करती है?
आसान भाषा में समझाता हूँ। जब दिल कमज़ोर होने लगता है तो शरीर उसकी भरपाई करने के लिए कुछ हार्मोन बनाता है। ये हार्मोन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं। कुछ समय के लिए यह शरीर की मदद करता है, लेकिन लंबे समय में दिल को और कमज़ोर कर देता है।
वाल्सार्टन उन हानिकारक हार्मोन को रोकती है, दिल पर बोझ कम होता है। सैकुबिट्रिल अच्छे प्रोटीन को बचाकर रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करती है। अतिरिक्त तरल पेशाब के ज़रिए बाहर जाता है। दोनों मिलकर दिल को आराम देते हैं और धीरे-धीरे उसकी ताकत लौटने में मदद करते हैं।
इस दवाई का सबसे बड़ा फायदा
इस दवाई का सबसे बड़ा फायदा एक मेडिकल शोध ने साबित किया है। PARADIGM-HF नाम के बड़े अध्ययन में पाया गया कि इस दवाई से दिल की बीमारी से मरने का खतरा कम हुआ और अस्पताल में बार-बार भर्ती होना भी घटा। इसे मेडिकल दुनिया में एक बहुत अहम खोज माना जाता है।
व्यावहारिक रूप से मरीज़ों को क्या फर्क दिखता है — साँस फूलना कम होती है, पैर की सूजन घटती है, थोड़ा चलना-फिरना मुमकिन हो जाता है। ज़िंदगी की गुणवत्ता बेहतर होती है। जैसा मुरुगेसन के साथ हुआ।
दवाई कैसे लेनी चाहिए?
सुबह और रात — दिन में दो बार दी जाती है। खाने के साथ लें या बिना खाए — कोई फर्क नहीं। डॉक्टर पहले कम मात्रा से शुरू करते हैं और धीरे-धीरे बढ़ाते हैं क्योंकि शरीर को इसकी आदत होने का समय चाहिए।
एक बेहद ज़रूरी बात — डॉक्टर की सलाह के बिना इस दवाई को कभी बंद न करें। अच्छा महसूस हो रहा है इसलिए बंद कर दिया तो दिल की हालत अचानक बिगड़ सकती है। यह बहुत खतरनाक स्थिति बन सकती है।
किन बातों का ध्यान रखें?
एक ज़रूरी बात — जो ACE inhibitor वर्ग की दवाई लेते रहे हों, वे सीधे इस दवाई पर न आएं। कम से कम 36 घंटे का अंतर रखना ज़रूरी है। नहीं तो Angioedema यानी खतरनाक सूजन आ सकती है।
पोटेशियम ज़्यादा वाले खाने को सीमित करें। केला, टमाटर, आलू — इन्हें संतुलित मात्रा में खाएं। क्योंकि यह दवाई खून में पोटेशियम का स्तर थोड़ा बढ़ा सकती है।
समय-समय पर खून की जाँच ज़रूरी है — ब्लड प्रेशर, किडनी की कार्यक्षमता और पोटेशियम का स्तर देखते रहना चाहिए।
साइड इफेक्ट्स
सबसे आम साइड इफेक्ट है चक्कर आना। ब्लड प्रेशर थोड़ा ज़्यादा कम हो जाए तो यह होता है। अचानक उठने पर सावधान रहें। खून में पोटेशियम बढ़ सकता है इसलिए जाँच न छोड़ें। किडनी की कार्यप्रणाली में कभी-कभी बदलाव आ सकता है।
किन्हें यह दवाई नहीं लेनी चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को यह दवाई बिल्कुल नहीं लेनी — यह भ्रूण के विकास को नुकसान पहुँचा सकती है। गंभीर लिवर की खराबी वालों को भी इससे बचने को कहा जाता है। डायबिटीज़ के मरीज़ जो Aliskiren दवाई लेते हों, वे इसके साथ न लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह ब्लड प्रेशर की गोली है?
ब्लड प्रेशर कम करती है — यह सच है। लेकिन इसका मुख्य मकसद कमज़ोर दिल की रक्षा करना है। ब्लड प्रेशर कम होना उसी मकसद का एक हिस्सा है।
क्या ज़िंदगी भर लेनी होगी?
अधिकतर मामलों में हाँ। दिल की विफलता एक दीर्घकालिक स्थिति है, उसे काबू में रखने के लिए दवाई जारी रखनी होती है। अच्छा महसूस होना इस बात का संकेत है कि दवाई काम कर रही है — बंद करने का कारण नहीं।
अच्छा लग रहा है, बंद कर दूं?
बिल्कुल नहीं। इस सवाल का यही एक जवाब है।
अंत में
दिल की विफलता सुनते ही बहुत लोग हिम्मत हार देते हैं। लेकिन सही दवाई के साथ ज़िंदगी को फिर से जीया जा सकता है — यह सैकुबिट्रिल वाल्सार्टन ने साबित किया है। मुरुगेसन की तरह बहुत से लोगों को इस दवाई से फायदा हुआ है।
लेकिन दवाई अकेले काफी नहीं। नमक कम करना, पानी की मात्रा सही रखना, वज़न पर नज़र रखना, रोज़ थोड़ा चलना, धूम्रपान और शराब से दूर रहना — यह सब साथ हो तो दिल लंबे समय तक ठीक से चलता है। दवाई एक सहारा है, जीवनशैली बदलाव उसे और मज़बूत करता है।
References:
https://medlineplus.gov/heartfailure.html
https://www.nhlbi.nih.gov/health/heart-failure/treatment

