Methylation Cycle Vitamins (Methylfolate Methylcobalamin P5P) tablet uses in Hindi | लिवर तक जाए बिना सीधे नसों तक पहुंचने वाले विटामिन: मेथिलेशन साइकल नाम का शरीर का छिपा हुआ राज़
डायबिटीज हुए दस साल हो गए। दवाएं खा रहे हैं। शुगर का स्तर नियंत्रण में है। लेकिन पैरों में एक अजीब सी अनुभूति है। रात को सोते समय पैरों में जलन जैसा महसूस होता है। ठंडी जमीन पर रखने से थोड़ी राहत मिलती है। सुबह पैरों का स्पर्श महसूस नहीं होता।
यह दर्द है या सुन्नपन? दोनों एक साथ कैसे हो सकते हैं, यह सोचकर लोग उलझन में पड़ जाते हैं। समझाएं तो — नसें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। शुगर नियंत्रण में होने के बावजूद पहले से क्षतिग्रस्त नसें ठीक नहीं हो रही हैं।
इस स्थिति में सामान्य B12 गोली काफी नहीं है। क्यों काफी नहीं है, क्या चाहिए, यह यह लेख समझाएगा।
शरीर में होने वाली मेथिलेशन साइकल नाम की अद्भुत प्रक्रिया
बहुत लोगों ने यह शब्द कभी सुना भी नहीं होगा। लेकिन शरीर में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में से एक है मेथिलेशन साइकल (Methylation Cycle)।
मेथिलेशन का मतलब है एक कार्बन और तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से बने मेथिल समूह (Methyl Group) को एक मॉलिक्यूल से दूसरे मॉलिक्यूल में स्थानांतरित करना। सुनने में यह कठिन लगता है, लेकिन इसके नतीजे बहुत आसानी से समझ आते हैं।
DNA की मरम्मत होना, लिवर से विषैले तत्व बाहर निकलना, न्यूरोट्रांसमीटर्स बनना, होमोसिस्टीन (Homocysteine) नाम के विषैले अमीनो एसिड का नियंत्रित होना — ये सब मेथिलेशन साइकल में ही होता है।
यह साइकल सही तरीके से चले, इसके लिए L-मेथिलफोलेट, पाइरिडॉक्सल-5-फॉस्फेट (P5P), और मेथिलकोबालामिन — इन तीनों की जरूरत होती है। ये एक-दूसरे पर निर्भर होकर काम करते हैं। एक कम हो जाए तो यह श्रृंखला टूट जाती है।
सामान्य गोली लिवर में अटक जाती है — एक्टिव रूप सीधे पहुंचता है
यह इस लेख की सबसे महत्वपूर्ण समझ है।
फोलिक एसिड एक सिंथेटिक रूप है। शरीर को इसे L-मेथिलफोलेट में बदलना पड़ता है। इस बदलाव के लिए MTHFR नाम का एंजाइम चाहिए होता है। MTHFR जीन में कमी हो तो यह बदलाव नहीं हो पाता। फोलिक एसिड खाने के बावजूद शरीर को नहीं मिल पाता।
यह बहुत सामान्य जेनेटिक कमी है। दुनिया की 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में इस कमी का कोई न कोई रूप पाया जाता है, ऐसा शोध बताते हैं। बहुत लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं होता।
उसी तरह साइनोकोबालामिन नाम का B12 रूप लिवर में मेथिलकोबालामिन में बदलना पड़ता है। लिवर सही ढंग से काम न करे या उम्र बढ़ने पर यह बदलाव कम हो जाता है।
पाइरिडॉक्सिन (सामान्य B6) को P5P में बदलना पड़ता है। बुजुर्गों में और कुछ बीमारियों में यह बदलाव कमजोर हो जाता है।
एक्टिव रूप दिए जाएं तो इन बदलावों की जरूरत ही नहीं पड़ती। सीधे कोशिकाओं तक पहुंच जाते हैं। नसों तक पहुंचते हैं। काम करते हैं।
होमोसिस्टीन नाम का छिपा हुआ हत्यारा
खून की जांच में होमोसिस्टीन नाम की एक माप होती है। बहुत लोग इसकी परवाह नहीं करते। लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण माप है।
मेथियोनिन (Methionine) नाम का अमीनो एसिड शरीर में इस्तेमाल होने के बाद होमोसिस्टीन में बदलता है। यह होमोसिस्टीन अगर वापस सही ढंग से मेथियोनिन में न बदले, तो खून में जमा हो जाता है।
ज्यादा होमोसिस्टीन रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी दीवार को नुकसान पहुंचाता है। वहां वसा जमती है। दिल के दौरे का खतरा बढ़ता है। स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। नसों पर भी असर पड़ता है।
इस होमोसिस्टीन को वापस मेथियोनिन में बदलने के लिए L-मेथिलफोलेट जरूरी है। मेथिलकोबालामिन एक को-फैक्टर है। P5P अगले चरण में मदद करता है। तीनों में से कोई न हो तो होमोसिस्टीन जमा होता रहता है।
सामान्य B12 गोली खाने के बावजूद होमोसिस्टीन का स्तर कम न हो, तो एक्टिव रूपों पर शिफ्ट होना चाहिए।
डायबिटीज से नसों को हुए नुकसान में यह गोली कैसे काम करती है?
तिरुपुर में रहने वाले 52 साल के मुरुगेसन 12 सालों से डायबिटीज के मरीज हैं। HbA1c सही मात्रा में रखे हुए हैं। लेकिन तीन सालों से पैरों में जलन और सुन्नपन हो रहा है। नर्व कंडक्शन वेलोसिटी टेस्ट (Nerve Conduction Velocity Test) करवाया। नस के संकेत पहुंचाने की गति कम पाई गई। मेथिलकोबालामिन + L-मेथिलफोलेट + P5P शुरू किया। चार महीनों में जलन काफी हद तक कम हो गई।
डायबिटीज में खून में ज्यादा ग्लूकोज नसों के आसपास की छोटी रक्त वाहिकाओं (Microvascular changes) को नुकसान पहुंचाता है। नसों तक पोषण नहीं पहुंच पाता। माइलिन शीथ नाम का सुरक्षा आवरण घिस जाता है।
मेथिलकोबालामिन माइलिन शीथ को फिर से बनाने में सीधे मदद करता है। यह पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy) में एक्सॉन रीजनरेशन (Axon Regeneration) नाम की नर्व फाइबर रिकवरी को भी उत्तेजित करता है।
L-मेथिलफोलेट नसों तक जाने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन बढ़ाता है। नाइट्रिक ऑक्साइड वाहिकाओं को फैलाता है। नसों तक रक्त प्रवाह बेहतर होता है।
P5P सेरोटोनिन और GABA के उत्पादन को नियमित करता है। GABA नस की अत्यधिक उत्तेजना को कम करता है। न्यूरोपैथिक पेन (Neuropathic Pain) कहलाने वाला जलन, सुई चुभने जैसा दर्द कम होता है।
मेगालोब्लास्टिक एनीमिया — दो विटामिन की कमी का नतीजा
लाल रक्त कोशिकाओं के बनने के लिए DNA चाहिए होता है। DNA बनने के लिए L-मेथिलफोलेट और मेथिलकोबालामिन दोनों जरूरी हैं। एक भी कम हो तो DNA सही ढंग से नहीं बनता।
DNA कम हो तो कोशिकाओं का विभाजन सही तरीके से नहीं हो पाता। वे बड़ी, अनियमित आकार की बनती हैं। इन्हें मेगालोब्लास्ट्स (Megaloblasts) कहते हैं। ये कोशिकाएं सही ढंग से ऑक्सीजन नहीं पहुंचातीं। मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो जाता है।
लगातार थकान, सांस फूलना, सिरदर्द, चेहरा पीला पड़ना — ये लक्षण हैं। सामान्य आयरन एनीमिया की तरह आयरन की गोली देने से ठीक नहीं होगा। क्योंकि वजह आयरन की कमी नहीं, B12 और फोलेट की कमी है।
मेथिलकोबालामिन सीधे बोन मैरो में RBC के उत्पादन को उत्तेजित करता है। L-मेथिलफोलेट DNA Synthesis के लिए जरूरी थायमिडिन (Thymidine) नाम की बिल्डिंग ब्लॉक देता है। दोनों मिलें तो मेगालोब्लास्टिक एनीमिया तेजी से ठीक होता है।
मानसिक स्वास्थ्य में भी इन विटामिनों की भूमिका
डिप्रेशन (Depression) वाले लोगों में L-मेथिलफोलेट कम पाया जाता है, यह शोध में देखा गया है। जिन्हें एंटी-डिप्रेसेंट्स काम नहीं करते, उनमें से कुछ को L-मेथिलफोलेट जोड़ने पर फायदा हुआ है।
P5P सेरोटोनिन और डोपामाइन के उत्पादन के लिए सीधे जरूरी को-फैक्टर है। ये दोनों न्यूरोट्रांसमीटर्स मूड, उत्साह, और रुचि को तय करते हैं।
मेथिलकोबालामिन दिमाग में नर्व कंडक्शन को बेहतर बनाता है। याददाश्त बेहतर होती है। उम्र बढ़ने पर होने वाली कॉग्निटिव डिक्लाइन (Cognitive Decline) धीमी हो सकती है।
मेटफॉर्मिन लेने वालों के लिए एक खास चेतावनी
डायबिटीज के मरीजों में ज्यादातर मेटफॉर्मिन लेते हैं। यह बहुत व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दवा है। लेकिन इसका एक खास साइड इफेक्ट है।
मेटफॉर्मिन लंबे समय तक लेने पर विटामिन B12 का अवशोषण कम हो जाता है। आंत में इंट्रिंसिक फैक्टर (Intrinsic Factor) नाम के B12 अवशोषण के लिए जरूरी प्रोटीन को मेटफॉर्मिन प्रभावित कर सकता है, ऐसा शोध बताते हैं।
इसलिए लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने वालों को साल में कम से कम एक बार B12 का स्तर जांचना चाहिए। B12 कम हो तो मेथिलकोबालामिन दिया जाता है।
मेथिलकोबालामिन और मेटफॉर्मिन के बीच दो घंटे का अंतर रखें। एक साथ लेने पर अवशोषण कम हो सकता है।
एंटासिड लेने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण बात
पैंटोप्राज़ोल, ओमेप्राज़ोल जैसी PPI दवाएं लेने वालों में भी B12 की कमी हो सकती है। पेट में एसिड कम हो तो B12 का अवशोषण मुश्किल हो जाता है।
लंबे समय तक एंटासिड लेने वाले दो घंटे के अंतराल पर मेथिलकोबालामिन ले सकते हैं।
मिर्गी की दवाएं फेनिटोइन, फेनोबार्बिटल लेने वालों में फोलेट का अवशोषण कम हो सकता है। डॉक्टर से पूछें।
शराब पीने की आदत B विटामिनों के अवशोषण को पूरी तरह रोक सकती है। शराब पीने वालों में B12, फोलेट की कमी बहुत आम होती है।
सही समय पर लेना चाहिए
सुबह नाश्ते के बाद लेना सबसे अच्छा रहता है। B विटामिन ऊर्जा को उत्तेजित करते हैं, इसलिए रात को लेने पर कुछ लोगों की नींद खराब हो सकती है। सुबह का समय बेहतर है।
गोली को निगल लें। चबाएं या चूर्ण न बनाएं। कुछ गोलियों पर खास कोटिंग होती है।
एक से तीन महीने तक लगातार लेना पड़ सकता है। दर्द निवारक की तरह एक दिन में फायदा नहीं मिलेगा। नसों को सुधरने में समय लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पेशाब पीला आ रहा है, डर लग रहा है P5P यानी B6 का एक्टिव रूप शरीर में इस्तेमाल होने के बाद बाकी बचा हुआ पेशाब के जरिए बाहर निकलता है। गहरा पीला रंग आ सकता है। यह पूरी तरह सामान्य है, कोई खतरा नहीं है।
यह दर्द निवारक है? नहीं। दर्द निवारक तुरंत दर्द को रोकता है। यह गोली नसों को धीरे-धीरे ठीक करती है। दर्द की मूल वजह को ठीक करती है। फायदा दिखने में 2 से 4 हफ्ते लग सकते हैं।
क्या जीवनभर लेना पड़ेगा? नसों की सेहत सुधरने तक लेना पड़ता है। उसके बाद खाने से ही B विटामिन मिल रहे हैं या नहीं, यह देखा जा सकता है। सिर्फ शाकाहारी खाना खाने वालों को लंबे समय की जरूरत हो सकती है। डॉक्टर तय करेंगे।
अंत में एक स्पष्ट बात
"विटामिन B12 खा रहा हूं, लेकिन नस का दर्द कम नहीं हो रहा" कहने वालों के लिए यह लेख एक जवाब देता है। आप जो विटामिन खा रहे हैं, वह एक्टिव रूप में शरीर तक पहुंच रहा है या नहीं, यह महत्वपूर्ण है। मेथिलेशन साइकल सही तरीके से चल रही है या नहीं, यह महत्वपूर्ण है।
L-मेथिलफोलेट, P5P, मेथिलकोबालामिन — इन तीनों एक्टिव रूपों के मिलने पर मेथिलेशन साइकल सही होती है। होमोसिस्टीन नियंत्रित होता है। नसें ठीक होती हैं। रक्त कोशिकाएं सही तरीके से बनती हैं।
डॉक्टर की सलाह से, शुगर नियंत्रण के साथ, व्यायाम के साथ — ये तीनों मिलें तो नसों की सेहत सच में बेहतर होगी।
References:
https://ods.od.nih.gov/factsheets/VitaminB12-HealthProfessional/ https://ods.od.nih.gov/factsheets/Folate-HealthProfessional/ https://ods.od.nih.gov/factsheets/VitaminB6-HealthProfessional/ https://medlineplus.gov/ency/article/000593.htm

