Lactic Acid Bacillus uses in Hindi | लैक्टिक एसिड बेसिलस की पूर्ण जानकारी व पूरा विवरण
खाना खाने के बाद पेट फूल जाता है, गैस की तकलीफ असहनीय हो जाती है, अचानक दस्त लग जाते हैं — ऐसी परेशानी से जूझने वाले लोगों की तादाद आजकल बहुत बढ़ गई है। वजह साफ है — खाने-पीने की आदतें बदल गई हैं, बाहर का खाना ज़्यादा हो गया है, और किसी न किसी कारण से एंटीबायोटिक दवाइयाँ लेने की नौबत भी बार-बार आती है। इन सब हालातों में आँत में रहने वाले अच्छे बैक्टीरिया धीरे-धीरे कम होते जाते हैं। उन्हीं अच्छे बैक्टीरिया को फिर से भरने में मदद करती है लैक्टिक एसिड बेसिलस टैबलेट।
लैक्टिक एसिड बेसिलस है क्या?
नाम सुनने में थोड़ा जटिल लगता है, लेकिन बात बिल्कुल सीधी है। यह एक प्रोबायोटिक है, यानी ऐसा बैक्टीरिया जो शरीर के लिए फायदेमंद है। हमारी आँत में सैकड़ों किस्म के बैक्टीरिया रहते हैं — कुछ अच्छे, कुछ बुरे। जब तक अच्छे बैक्टीरिया ज़्यादा होते हैं तब तक आँत ठीक से काम करती है। जब बुरे बैक्टीरिया हावी हो जाएं तो मुसीबत शुरू होती है।
लैक्टिक एसिड बेसिलस प्राकृतिक रूप से दही, छाछ और खमीरी खाने में पाया जाता है। दादा-दादी के ज़माने में रोज़ दही खाने की आदत थी — उसके पीछे एक समझदारी थी। लेकिन आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पर्याप्त मात्रा में प्रोबायोटिक खाना खाना हमेशा मुमकिन नहीं होता। तब टैबलेट का रूप एक अच्छा विकल्प बन जाता है।
पेट में यह काम कैसे करता है?
आँत सिर्फ खाना पचाने की नली नहीं है। यह एक जटिल जैविक दुनिया है। जब तक इसमें अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं, बुरे बैक्टीरिया को पनपने की जगह ही नहीं मिलती। लैक्टिक एसिड बेसिलस आँत में पहुँचकर लैक्टिक एसिड बनाता है। यह अमल आँत का pH संतुलन बनाए रखता है। बुरे बैक्टीरिया को पनपने के लिए जो माहौल चाहिए, यह उसे बिगाड़ देता है।
इसके साथ-साथ यह खाने से पोषक तत्वों का अवशोषण भी आसान बनाता है। कुछ लोग कहते हैं — "खाता तो अच्छा हूँ, फिर भी शरीर में ताकत नहीं आती।" इसकी एक वजह हो सकती है कि आँत ठीक से काम नहीं कर रही। लैक्टिक एसिड बेसिलस उस स्थिति को सुधारता है।
किन्हें इस प्रोबायोटिक टैबलेट की ज़रूरत होती है?
एंटीबायोटिक लेने वालों को
यह इसका सबसे ज़रूरी उपयोग है। एंटीबायोटिक दवाइयाँ संक्रमण से लड़ते वक्त सिर्फ बुरे बैक्टीरिया नहीं मारतीं — आँत के अच्छे बैक्टीरिया भी उनकी चपेट में आ जाते हैं। इसीलिए एंटीबायोटिक लेने के दौरान या उसके बाद बहुत लोगों को दस्त लगते हैं, पेट बिगड़ जाता है। इस वक्त लैक्टिक एसिड बेसिलस टैबलेट आँत को फिर से दुरुस्त करने में मदद करती है।
दस्त और पेट दर्द से परेशान लोगों को
खाते ही शौचालय दौड़ना पड़े, दिन में कई बार दस्त हो — ऐसी परेशानी में यह टैबलेट जल्दी राहत देती है। आँत में अच्छे बैक्टीरिया भरने पर आँत का असामान्य सिकुड़ना-फैलना रुकता है।
IBS यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम वालों को
IBS एक लंबे समय की समस्या है। कुछ दिन दस्त, कुछ दिन कब्ज़, पेट दर्द, गैस — यह सब बारी-बारी आता रहता है। इसका एक ही पक्का इलाज नहीं होता, लेकिन प्रोबायोटिक्स इस स्थिति को काफी हद तक संभालने में मदद करते हैं — ऐसा शोध बताते हैं।
इस टैबलेट से क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
सिर्फ पेट तक इसका असर सीमित नहीं है, पूरे शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है। जब आँत स्वस्थ होती है तो रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने आप बेहतर हो जाती है। विज्ञान कहता है कि हमारे शरीर की 70 प्रतिशत रोग प्रतिरोधक कोशिकाएं आँत में ही रहती हैं।
जिन्हें बार-बार मुँह में छाले पड़ते हों, उन्हें भी इस प्रोबायोटिक से फायदा होता देखा गया है। क्योंकि मुँह के छाले अक्सर पाचन तंत्र की गड़बड़ी का एक संकेत होते हैं। आँत ठीक होने पर छाले आने की तकलीफ कम होती है।
खाने के बाद पेट फूलना, डकारें आना, बार-बार गैस निकलना — इन सब से परेशान लोगों को भी यह टैबलेट अच्छा आराम देती है।
टैबलेट कैसे लेनी चाहिए?
खाना खाने के बाद लेना बेहतर होता है। खाली पेट लेने पर पेट का एसिड बैक्टीरिया को नुकसान पहुँचा सकता है। खाने के साथ लेने पर भोजन एक सुरक्षा कवच का काम करता है।
गुनगुने पानी के साथ निगलें — गर्म पानी नहीं। ज़्यादा गर्म पानी से जीवित बैक्टीरिया मर सकते हैं। ठंडा पानी भी चलेगा, लेकिन गुनगुना सबसे अच्छा है।
डॉक्टर ने जितने दिनों तक लेने को कहा हो, उतने दिन पूरे करें। पेट ठीक लगने लगा तो बीच में बंद नहीं करना चाहिए। बैक्टीरिया को आँत में जम जाने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।
टैबलेट को सही तरह से रखना भी ज़रूरी है
यह बात बहुत कम लोगों को पता होती है। लैक्टिक एसिड बेसिलस टैबलेट में जीवित बैक्टीरिया होते हैं। ज़्यादा गर्मी लगने पर वे मर जाते हैं और टैबलेट बेकार हो जाती है। इसे ठंडी जगह रखना चाहिए। कुछ टैबलेट्स को फ्रिज में रखने की हिदायत दी जाती है — उसे ध्यान से मानें।
एक्सपायरी डेट भी देखें। एक्सपायर हुई टैबलेट से नुकसान नहीं होगा, लेकिन फायदा भी नहीं मिलेगा।
साइड इफेक्ट्स और किन बातों का ध्यान रखें
यह टैबलेट आमतौर पर बहुत सुरक्षित होती है। शुरुआती कुछ दिनों में थोड़ी गैस बन सकती है या पेट में आवाज़ें आ सकती हैं। यह असल में अच्छे बैक्टीरिया के आँत में बसने की प्रक्रिया का एक संकेत है। कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाता है।
बहुत कम मामलों में किसी को त्वचा पर खुजली या चकत्ते हो सकते हैं। ऐसा हो तो डॉक्टर को बताएं।
जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो — जैसे कैंसर का इलाज कराने वाले या HIV के मरीज़ — वे डॉक्टर की सलाह के बिना यह टैबलेट न लें। बेहद कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता में प्रोबायोटिक कभी-कभी पेचीदगी पैदा कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दही खाएं तो क्या काफी नहीं है, टैबलेट की क्या ज़रूरत?
दही अच्छा है, इसमें कोई शक नहीं। एक कटोरी दही में एक निश्चित मात्रा में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। लेकिन जब दस्त गंभीर हों या एंटीबायोटिक चल रही हो, तब कहीं ज़्यादा सघन मात्रा में प्रोबायोटिक की ज़रूरत होती है। टैबलेट में दही से कई गुना ज़्यादा बैक्टीरिया होते हैं। इसलिए ज़रूरत के वक्त टैबलेट बेहतर विकल्प है।
बच्चों को दे सकते हैं?
दे सकते हैं, लेकिन बच्चों के लिए अलग से ड्रॉप्स या सैशे के रूप में यह मिलती है जो अक्सर स्वाद में भी अच्छी होती है। बाल रोग विशेषज्ञ से पूछकर लेना बेहतर है।
कितने दिन लेनी चाहिए?
दस्त जैसी तीव्र समस्या के लिए तीन से पाँच दिन काफी हो सकते हैं। IBS जैसी पुरानी समस्या के लिए लंबे समय तक लेनी पड़ सकती है — यह फैसला डॉक्टर करेंगे।
अंत में
हमारी सेहत सिर्फ बाहर से नहीं दिखती। अंदर आँत में क्या हो रहा है — यही असली पैमाना है। जब आँत सही से काम करती है तो खाना ठीक से पचता है, पोषक तत्व शरीर में समाते हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत रहती है और मन भी ताज़ा रहता है। हाँ — आँत की सेहत और मानसिक स्थिति का सीधा संबंध है, यह अब शोध में साफ हो चुका है।
लैक्टिक एसिड बेसिलस टैबलेट इस आँत की सेहत को ठीक करने में एक भरोसेमंद साथी है। दही, छाछ, खमीरी खाने के ज़रिए प्राकृतिक रूप से प्रोबायोटिक लेना हमेशा अच्छा है। लेकिन जब हालात अनुकूल न हों या ज़्यादा ज़रूरत हो, तब टैबलेट एक बढ़िया रास्ता है।
पेट खराब है तो दर्द सहकर चुप मत बैठें। डॉक्टर से बात करें, सही इलाज लें। आँत ठीक हो तो पूरी ज़िंदगी थोड़ी आसान हो जाती है।
References:
https://www.nccih.nih.gov/health/probiotics-usefulness-and-safety https://medlineplus.gov/irritablebowelsyndrome.html https://my.clevelandclinic.org/health/body/the-gut-brain-connection https://www.health.harvard.edu/diet-and-nutrition/the-benefits-of-probiotics

