Ferrous Sulfate Folic Acid tablet uses in Hindi | खून की कमी को जड़ से खत्म करने वाली दवाई: फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड की पूरी जानकारी व पूरा विवरण
एक माँ बच्चे को जन्म देने के कुछ ही दिनों बाद बहुत थकान और साँस फूलने की शिकायत करती है। अस्पताल में जाँच होती है — हीमोग्लोबिन 7 निकलता है। डॉक्टर कहते हैं — "खून की कमी है, यह गोली रोज़ खाइए।" वह गोली है फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड।
भारत में खून की कमी सिर्फ एक बीमारी नहीं — यह एक सामाजिक समस्या है। खासकर महिलाओं में यह चुपचाप फैलती है। थकान को सामान्य मान लेते हैं, "काम ज़्यादा है, ऐसे ही होगा" कहकर टाल देते हैं। लेकिन अंदर ही अंदर लाल रक्त कोशिकाएं कम होती जाती हैं। इस लेख में वह दवाई क्या करती है, किसे चाहिए और कैसे लेनी है — यह सब विस्तार से देखते हैं।
खून की कमी क्या है? इतनी आम क्यों है?
खून में हीमोग्लोबिन नाम का प्रोटीन होता है। इसका काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर की हर कोशिका तक पहुँचाना है। हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन ज़रूरी है। आयरन कम हो तो हीमोग्लोबिन कम होगा, ऑक्सीजन की आपूर्ति रुकेगी, शरीर थक जाएगा।
भारत में यह इतनी आम क्यों है — इसलिए कि हमारे खाने में आयरन वाली चीज़ें पर्याप्त नहीं होतीं। पालक, मटर, चने में आयरन है यह जानते हैं, लेकिन रोज़ खाते नहीं। गर्भावस्था और मासिक धर्म में खून जाने से ज़रूरत कई गुना बढ़ जाती है — सिर्फ खाने से वह ज़रूरत पूरी नहीं होती।
WHO और भारत सरकार की आवश्यक दवाइयों की सूची में फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड पहले स्थान पर है। कारण — यह सस्ती है, असरदार है, हर जगह मिलती है।
दवाई के दो तत्व क्या करते हैं?
फेरस सल्फेट — आयरन का सरल रूप
आयरन को टैबलेट के रूप में देने के कई तरीके हैं। फेरस सल्फेट सबसे पुराना, भरोसेमंद और सस्ता रूप है। टैबलेट पर IP लिखा हो तो इसका मतलब Indian Pharmacopoeia के मानकों पर खरा उतरा है — गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं।
फोलिक एसिड — विटामिन B9 — यह साथ में क्यों?
नई लाल रक्त कोशिकाएं बनाते वक्त उनका DNA तैयार होना चाहिए। उस DNA उत्पादन के लिए फोलिक एसिड अनिवार्य है। सिर्फ आयरन काफी नहीं — फोलिक एसिड भी चाहिए। इसीलिए दोनों एक ही गोली में मिले होते हैं।
गर्भावस्था में फोलिक एसिड और भी ज़रूरी है। बच्चे की रीढ़ और दिमाग सही तरह बनने के लिए गर्भ के शुरुआती हफ्ते बहुत अहम होते हैं। Neural Tube Defects नाम की जन्मजात कमियाँ फोलिक एसिड से रोकी जा सकती हैं। इसीलिए डॉक्टर गर्भधारण से पहले ही इसे शुरू करने को कहते हैं।
शरीर के अंदर क्या होता है?
गोली निगलने के बाद वह पेट में घुलती है और छोटी आँत के पहले हिस्से Duodenum में अवशोषित होती है। वहाँ से खून में मिल जाती है।
खून में Transferrin नाम का एक प्रोटीन होता है। यह डाकिए की तरह आयरन को लेकर हड्डी की मज्जा तक पहुँचाता है। वहीं नई लाल रक्त कोशिकाएं बनती हैं। आयरन पहुँचने पर उत्पादन तेज़ होता है। धीरे-धीरे हीमोग्लोबिन बढ़ता है, शरीर को ऑक्सीजन मिलती है, थकान कम होती है।
यह सब तुरंत नहीं होता। तीन से छह हफ्तों में हीमोग्लोबिन बढ़ना शुरू होता है। पूरा फायदा तीन से छह महीनों में मिलता है।
किन्हें यह दवाई सबसे ज़्यादा ज़रूरी है?
गर्भवती महिलाओं को
गर्भावस्था में माँ के शरीर में खून की मात्रा 50 प्रतिशत तक बढ़नी चाहिए। बच्चे को भी आयरन देना होता है। खाना अकेले यह ज़रूरत पूरी नहीं कर सकता। इसीलिए सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को यह दवाई मुफ्त दी जाती है। पहली बार प्रसूति विशेषज्ञ के पास जाते ही यह शुरू हो जाती है।
मासिक धर्म में ज़्यादा खून जाने वाली महिलाओं को
कुछ महिलाओं को हर महीने बहुत खून जाता है। शरीर भरपाई नहीं कर पाता, खून की कमी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। ऐसे में फेरस सल्फेट एक निश्चित समय के लिए दी जाती है।
स्कूल जाने वाली किशोरियों को
सरकार के WIFS कार्यक्रम — Weekly Iron and Folic Acid Supplementation — के तहत स्कूली छात्राओं को हफ्ते में एक बार यह दवाई दी जाती है। नीली और लाल गोलियों के रूप में उम्र के हिसाब से दी जाती है। किशोरावस्था में आयरन की ज़रूरत अचानक बढ़ती है — इसके लिए पहले से तैयारी ज़रूरी है।
ऑपरेशन के बाद
बड़े ऑपरेशन के बाद शरीर को खोया हुआ खून वापस बनाने में समय लगता है। उस दौरान फेरस सल्फेट रिकवरी तेज़ करती है।
सही तरीके से नहीं ली तो फायदा नहीं
यह दवाई कैसे लेते हैं — यह बहुत ज़रूरी है। गलत तरीके से लेने पर फायदा आधा हो जाता है।
सबसे अच्छा तरीका — विटामिन C के साथ लेना। नींबू पानी के साथ गोली लें। विटामिन C आयरन को Ferric से Ferrous रूप में बदलता है जिससे शरीर आसानी से सोख सकता है। आँवले का रस भी यही काम करता है।
कैल्शियम की गोली या दूध के साथ न लें। कैल्शियम और आयरन दोनों एक साथ अवशोषण के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं — दोनों ही ठीक से नहीं जाते। कम से कम दो घंटे का अंतर रखें।
चाय या कॉफी के साथ न लें। टैनिन नाम के अणु आयरन को पकड़ लेते हैं और शरीर को जाने नहीं देते। गोली लेने के कम से कम आधे घंटे बाद चाय पिएं।
खाली पेट ले सकते हैं, लेकिन जी मिचलाए तो खाने के बाद लेना बेहतर है।
साइड इफेक्ट्स से डरें नहीं — बस जान लें
गोली खाने के बाद मल काला हो सकता है। इसे देखकर बहुत लोग डर जाते हैं। यह खतरनाक नहीं है। जो आयरन पूरी तरह अवशोषित नहीं हुआ वह मल के साथ बाहर निकलता है और यह रंग बनाता है। गोली बंद होते ही सामान्य हो जाता है।
कब्ज़ कुछ लोगों को होती है। खूब पानी पिएं, रेशेदार सब्ज़ियाँ खाएं। पेट में भारीपन का एहसास कुछ दिनों में ठीक होता है।
मुँह में धातु जैसा स्वाद आ सकता है। गोली लेने के बाद गुनगुने पानी से कुल्ला करने पर यह कम होता है।
किन्हें यह दवाई नहीं लेनी चाहिए?
थैलेसीमिया या Sickle Cell Anemia जैसी वंशानुगत रक्त बीमारियों वाले बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। इनमें खून की कमी आयरन की कमी से नहीं, लाल कोशिकाओं के जल्दी नष्ट होने से होती है। इन्हें अतिरिक्त आयरन देने पर शरीर में जमा होकर नुकसान करता है।
पेट में अल्सर हो तो सावधानी ज़रूरी है। फेरस सल्फेट पेट में थोड़ी एसिडिटी बनाती है — अल्सर बिगड़ सकता है। ऐसे लोगों के लिए Ferrous Ascorbate हल्का रूप होता है, डॉक्टर वह दे सकते हैं।
जाँच बहुत ज़रूरी है
दवाई शुरू करने से पहले CBC यानी Complete Blood Count ज़रूर कराएं। सिर्फ हीमोग्लोबिन नहीं — Ferritin यानी शरीर में जमा आयरन का स्तर भी देखें।
एक आम गलती — हीमोग्लोबिन सामान्य हो जाए तो दवाई बंद कर देना। खून में अच्छा हो गया मतलब काफी नहीं — जिगर के Ferritin भंडार को भरने में कुछ हफ्ते और चाहिए। जल्दी बंद किया तो जल्दी फिर कम हो जाएगा।
तीन महीने बाद फिर CBC कराएं और डॉक्टर को दिखाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हीमोग्लोबिन ठीक हो जाए तो दवाई बंद करें?
नहीं। लाल कोशिकाओं में अच्छा हो जाए, लेकिन हड्डी की मज्जा का भंडार भरने में कुछ हफ्ते और लगते हैं। डॉक्टर के कहे समय तक जारी रखें।
बच्चों को यह गोली दे सकते हैं?
बड़ों की गोली बच्चों को नहीं देनी। बच्चों के लिए अलग सिरप होती है — डॉक्टर उम्र के हिसाब से मात्रा तय करेंगे।
स्तनपान के दौरान ले सकते हैं?
हाँ, डॉक्टर की सलाह से जारी रख सकते हैं। प्रसव के बाद भी आयरन की ज़रूरत बनी रहती है।
अंत में एक सच्ची बात
खून की कमी एक छिपी बीमारी है। इसके साथ जीते जाते हैं, आदत हो जाती है। "थोड़ा थका हुआ हूँ, आराम करूँगा" — यह कहकर महीने निकल जाते हैं।
फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड सस्ती है, आसानी से मिलती है, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। लेकिन सही तरीके से, सही समय पर, डॉक्टर की सलाह से लेने पर ही पूरा फायदा मिलता है। खाने में पालक शामिल करें, जाँच कराएं, ज़रूरत हो तो दवाई लें। बिना थकान की ज़िंदगी आपका हक है।
References:
https://medlineplus.gov/ency/article/000584.htm
https://www.cdc.gov/folic-acid/about/index.html

