Dydrogesterone 10mg tablet uses in Hindi | गर्भ की रक्षा करने वाली दवाई: डाइड्रोजेस्टेरोन 10mg के बारे में हर महिला को जानना चाहिए
तीन बार गर्भपात। हर बार टूटकर, फिर उठकर, फिर उम्मीद से कोशिश करने वाली एक महिला की कहानी कोयम्बटूर की एक प्रसूति विशेषज्ञ ने साझा की। चौथी बार गर्भ ठहरा तो डाइड्रोजेस्टेरोन दी गई। आज उस महिला का दो साल का बेटा है।
यह फिल्मी कहानी नहीं है। ऐसे अनुभव भारत में हज़ारों महिलाओं के साथ होते हैं। गर्भ ठहरना ही काफी नहीं — उसे पूरी तरह बचाना उससे बड़ी चुनौती है। उस चुनौती में आधुनिक चिकित्सा का एक ज़रूरी औज़ार है डाइड्रोजेस्टेरोन।
गर्भावस्था में हार्मोन इतने ज़रूरी क्यों हैं?
गर्भ सिर्फ एक जैविक प्रक्रिया नहीं — यह एक बेहद नाज़ुक हार्मोन का नृत्य है। इस नृत्य में ज़रा भी ताल बिगड़े तो गर्भ टिकने में दिक्कत आ सकती है।
गर्भधारण के पहले दिन से ही प्रोजेस्टेरोन नाम का हार्मोन शरीर में बढ़ने लगता है। इसका काम है गर्भाशय की अंदरूनी परत को मुलायम और मोटा रखना — जैसे बच्चे के लिए एक आरामदायक बिस्तर। यह हार्मोन पर्याप्त न हो तो गर्भाशय की दीवार तैयार नहीं रहती। भ्रूण टिक नहीं पाता, या टिके तो गिर जाता है।
कुछ महिलाओं में स्वाभाविक रूप से प्रोजेस्टेरोन कम बनता है। कुछ में गर्भाशय की दीवार ही भ्रूण को सहारा देने में कमज़ोर होती है। इस स्थिति में बाहर से प्रोजेस्टेरोन देना ही डाइड्रोजेस्टेरोन का मूल उद्देश्य है।
डाइड्रोजेस्टेरोन क्या है?
यह प्रोजेस्टेरोन का कृत्रिम रूप है। लेकिन सिर्फ नकल नहीं — बेहतर रूप।
प्राकृतिक प्रोजेस्टेरोन को मुँह से गोली के रूप में दें तो आँत में पचते-पचते बहुत मात्रा बेकार हो जाती है। लेकिन डाइड्रोजेस्टेरोन मुँह से लेने पर भी शरीर में अच्छी मात्रा में अवशोषित होती है। गर्भाशय पर सीधे काम करती है। इंजेक्शन की ज़रूरत नहीं, दर्द नहीं।
दूसरी कृत्रिम हार्मोन दवाइयों में एक समस्या होती है — वे पुरुष हार्मोन जैसा असर भी दिखाती हैं जिससे अनचाहे साइड इफेक्ट्स होते हैं। डाइड्रोजेस्टेरोन में यह समस्या नहीं है। यह सिर्फ गर्भाशय पर काम करती है, बाकी जगह अनावश्यक असर नहीं डालती।
किन्हें यह दवाई दी जाती है?
शुरुआती खून आने वाली गर्भवती महिलाओं को
गर्भ के पहले तीन महीने बहुत नाज़ुक होते हैं। इस दौरान कुछ महिलाओं को हल्का खून आना या पेट के नीचे खिंचाव हो सकता है। इसे Threatened Miscarriage कहते हैं — गर्भपात का शुरुआती संकेत।
इस वक्त शरीर बता रहा होता है कि प्रोजेस्टेरोन कम है, गर्भाशय की दीवार कमज़ोर हो रही है। डाइड्रोजेस्टेरोन उस कमी को पूरा करके गर्भाशय को फिर से मज़बूत करती है।
चेन्नई की 29 साल की प्रिया आठवें हफ्ते में हल्के खून के साथ अस्पताल आईं। अल्ट्रासाउंड में भ्रूण था, दिल की धड़कन थी। डॉक्टर ने डाइड्रोजेस्टेरोन दी। सोलह हफ्ते तक ली। आज उनके पास स्वस्थ बच्चा है।
बार-बार गर्भपात झेलने वाली महिलाओं को
दो या उससे ज़्यादा बार बिना कारण गर्भपात हुआ हो तो इसे Habitual Abortion कहते हैं। ऐसी महिलाओं को अगला गर्भ ठहरते ही — कभी-कभी पहले से ही — डाइड्रोजेस्टेरोन शुरू की जाती है।
इन महिलाओं में प्रोजेस्टेरोन कम बनता हो सकता है, या प्रतिरक्षा तंत्र भ्रूण को बाहरी चीज़ समझकर हमला कर सकता है। दोनों स्थितियों में यह दवाई सुरक्षा घेरे की तरह काम करती है।
IVF या IUI के बाद
कृत्रिम गर्भाधान में अंडाणु और शुक्राणु लैब में मिलाए जाते हैं। लेकिन गर्भाशय में सफलतापूर्वक टिकने के लिए उसकी अंदरूनी दीवार तैयार होनी चाहिए। IVF के दौरान स्वाभाविक हार्मोन चक्र थोड़ा बदला होता है। उस वक्त प्रोजेस्टेरोन का अतिरिक्त सहारा अनिवार्य है।
शरीर के अंदर यह कैसे काम करती है?
गोली निगलने के बाद यह खून में मिलकर गर्भाशय तक पहुँचती है। वहाँ तीन ज़रूरी काम होते हैं।
पहला — गर्भाशय की अंदरूनी परत Endometrium मोटी और मुलायम होती है। यह भ्रूण के लिए सुरक्षित आरामदेह जगह बन जाती है।
दूसरा — गर्भाशय की मांसपेशियाँ बेवजह सिकुड़ती नहीं। सिकुड़ें तो भ्रूण बाहर धकेल सकती हैं। डाइड्रोजेस्टेरोन उन अनावश्यक सिकुड़नों को रोकती है।
तीसरा — सबसे अहम काम — माँ के प्रतिरक्षा तंत्र को शांत करना। पलने वाला भ्रूण माँ के लिए आधा अपरिचित है — उसमें पिता के जीन भी हैं। कभी-कभी माँ का प्रतिरक्षा तंत्र समझे बिना उस पर हमला करने लगता है। डाइड्रोजेस्टेरोन एक ढाल बनकर कहती है — "यह दोस्त है, दुश्मन नहीं।"
सही तरीके से लेना ज़रूरी है
डाइड्रोजेस्टेरोन डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल नहीं लेनी। मात्रा और अवधि हर महिला की स्थिति के हिसाब से अलग होती है।
आमतौर पर दिन में एक या दो गोली दी जाती है। गर्भ के 12 से 20 हफ्तों तक लेना सामान्य है। खतरे की गंभीरता के हिसाब से डॉक्टर यह समय बढ़ा सकते हैं।
एक ज़रूरी बात — हर दिन एक ही समय पर लें। सुबह 8 बजे तय किया तो हर दिन उसी वक्त। इससे शरीर में हार्मोन का स्तर एक जैसा रहेगा। कभी सुबह कभी शाम करने से हार्मोन का स्तर ऊपर-नीचे होता है — यह ठीक नहीं।
डॉक्टर के बिना अचानक बंद कभी नहीं करनी। एकदम बंद करने पर गर्भाशय में हार्मोन का स्तर अचानक गिरता है, खून आ सकता है।
साइड इफेक्ट्स — डरें नहीं, तैयार रहें
शुरुआती दिनों में हल्का सिरदर्द हो सकता है। स्तनों में भारीपन या हल्का दर्द हो सकता है। ये गर्भावस्था के सामान्य बदलावों जैसे लगते हैं इसलिए अकेले डाइड्रोजेस्टेरोन को कारण नहीं कहा जा सकता।
मूड में बदलाव कुछ महिलाओं को होते हैं। हार्मोन बदलने पर दिमाग भी खुद को ढालता है — थोड़ी चिड़चिड़ाहट या रोना आ सकता है। यह स्वाभाविक है।
जी मिचलाना हो सकता है। खाने के साथ गोली लेने पर यह कम होता है।
एक अच्छी खबर — ब्लड प्रेशर, वज़न और शुगर पर इसका असर बहुत कम है। दूसरी हार्मोन दवाइयों की तुलना में यह बहुत बड़ा फायदा है।
किन्हें यह नहीं लेनी चाहिए?
बिना कारण योनि से खून आता हो तो पहले उसकी वजह जानें। सीधे डाइड्रोजेस्टेरोन नहीं लेनी।
लिवर की गंभीर खराबी हो तो सावधानी चाहिए — यह दवाई लिवर में पचती है। Meningioma नाम का हार्मोन से जुड़ा ट्यूमर का इतिहास हो तो डॉक्टर को पूरी जानकारी दें।
निगरानी बहुत ज़रूरी है
डाइड्रोजेस्टेरोन लेते वक्त नियमित अल्ट्रासाउंड ज़रूरी है। दवाई गर्भ को कैसे बचा रही है — डॉक्टर को देखना होगा। बच्चे की धड़कन, विकास, तरल की मात्रा — सब पर नज़र रखनी होगी।
इसके साथ फोलिक एसिड भी ले सकती हैं — डॉक्टर अक्सर दोनों साथ लिखते हैं। दोनों अलग-अलग काम करती हैं, एक-दूसरे में बाधा नहीं डालतीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह दवाई बच्चे को नुकसान करेगी?
नहीं। डाइड्रोजेस्टेरोन दशकों से इस्तेमाल हो रही है। लंबे शोध में बच्चे के विकास पर कोई बुरा असर नहीं दिखा। इसीलिए गर्भावस्था में इस्तेमाल के लिए मान्यता प्राप्त है।
गोली लेते ही उल्टी हो गई तो?
गोली लेने के तीस मिनट के अंदर उल्टी हो तो दवाई ठीक से अवशोषित नहीं हुई। डॉक्टर को बताएं — वे दूसरी खुराक लेने की सलाह दे सकते हैं।
हार्मोन की गोली है तो आदत पड़ जाएगी?
नहीं। खतरे का समय निकलने पर धीरे-धीरे मात्रा कम की जाती है। जैसे-जैसे गर्भ आगे बढ़ता है, नाल खुद प्रोजेस्टेरोन बनाने लगती है। तब दवाई की ज़रूरत कम होती जाती है।
अंत में एक सच्ची बात
माँ बनने का सपना बड़ा होता है। वह सपना कभी-कभी मुश्किलों के बीच खिलता है। गर्भपात झेल चुकी महिलाओं का वह दर्द शब्दों में नहीं कहा जा सकता। उस दर्द के बीच डाइड्रोजेस्टेरोन एक उम्मीद की दवाई बनकर खड़ी होती है।
लेकिन यह मत भूलिए — यह दवाई डॉक्टर के हाथ का एक औज़ार है। खुद दुकान से लेकर खाने से न फायदा होगा, न खतरा टलेगा। सही जाँच, सही निदान, सही मात्रा — ये तीनों जब मिलें तभी यह दवाई पूरा असर दिखाती है।
अपनी माँ बनने की यात्रा में कोई भी सवाल हो तो डॉक्टर से बेझिझक पूछें। एक अच्छा सवाल एक ज़िंदगी बचा सकता है।
References:
https://medlineplus.gov/miscarriage.html
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/22794306

