Citicoline Piracetam tablet uses in Hindi | लकवा और भूलने की बीमारी में सिटिकोलिन पिरासेटम दिमाग को फिर जगाने वाली दवाई
एक साल पहले तक सेखर अपने घर की देखभाल करते थे। पोते-पोतियों को कहानियाँ सुनाते, अखबार पढ़ते, रसोइया न हो तो खुद खाना बनाते। उम्र 68 साल। फिर लकवा आया। तीन दिन अस्पताल में रहे।
जान बची। लेकिन घर आने के बाद बदलाव दिखा। बोलने में शब्द नहीं आते, कल क्या हुआ याद नहीं रहता, हाथ में ताकत नहीं। डॉक्टर ने कई दवाइयों के साथ सिटिकोलिन और पिरासेटम का कॉम्बिनेशन भी दिया। छह महीने बाद सेखर फिर अखबार पढ़ रहे हैं, पोते को कहानी सुना रहे हैं।
यह सबके साथ नहीं होता — लेकिन इस दवाई ने दिमाग की रिकवरी में मदद की, यह सच है।
इस दवाई में क्या होता है?
सिटिकोलिन शरीर में खुद बनने वाला एक ज़रूरी रसायन है। दिमाग की कोशिकाओं की दीवार बनाने में यह ज़रूरी है। दिमाग को ठीक से काम करने के लिए Acetylcholine नाम का एक नर्व ट्रांसमीटर चाहिए — उसे बनाने में सिटिकोलिन अहम भूमिका निभाता है। लकवे या सिर की चोट से दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं — सिटिकोलिन उन्हें सुरक्षित रखने और फिर से बनाने में मदद करता है।
पिरासेटम Nootropic कहलाने वाली दिमाग को बेहतर करने वाली दवाइयों में सबसे पहले खोजी गई दवाई है। दिमाग तक खून और ऑक्सीजन सही पहुँचने में मदद करती है। कोशिकाएं ग्लूकोज़ को ऊर्जा में बदलने की क्षमता बेहतर होती है। दिमाग के दोनों हिस्सों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान आसान होता है।
दोनों मिलें तो दिमाग को पोषण देने के साथ कोशिकाओं की रक्षा होती है और नए तंत्रिका संबंध बनाने में भी मदद मिलती है।
दिमाग में क्या होता है?
लकवे में दिमाग के एक हिस्से तक खून पहुँचना बंद हो जाता है। वहाँ की कोशिकाएं ऑक्सीजन न मिलने से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। बोलने की क्षमता, याददाश्त, हाथ-पैर की गति — जो भी वह हिस्सा नियंत्रित करता था, वह प्रभावित होता है।
दिमाग की एक खासियत है जिसे Neuroplasticity कहते हैं। दिमाग नए रास्ते बना सकता है, क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की भरपाई दूसरे हिस्से कुछ हद तक कर सकते हैं। इस रिकवरी प्रक्रिया को सिटिकोलिन और पिरासेटम का कॉम्बिनेशन सहारा देता है।
दुर्घटना में सिर पर चोट लगने वालों और बुढ़ापे में भूलने की बीमारी में भी यह कॉम्बिनेशन मददगार रहता है।
किन्हें यह दवाई दी जाती है?
लकवे के मरीज़ों को शुरुआती इलाज में ही यह दवाई शामिल की जाती है। दिमाग की क्षति को और बढ़ने से रोकने और रिकवरी तेज़ करने में मदद करती है।
सिर पर चोट लगने वाले, गाड़ी दुर्घटना में सिर घायल होने वाले — उनके लिए भी दी जाती है।
Alzheimer's और Dementia में यह पूरी तरह ठीक नहीं करती, लेकिन स्थिति के और तेज़ी से बिगड़ने को धीमा कर सकती है।
एक ज़रूरी बात — यह रोज़मर्रा की भूलने की दिक्कत के लिए या पढ़ाई आसान बनाने के लिए लेने की दवाई नहीं है। गंभीर मेडिकल स्थितियों में, डॉक्टर की लिखी दवाई के रूप में ही लेनी चाहिए।
दवाई कैसे लेनी चाहिए?
आमतौर पर सुबह और शाम दो बार दी जाती है। लेकिन रात को लेने पर कुछ लोगों को नींद नहीं आती। इसलिए रात की खुराक सोने से कुछ घंटे पहले लेना बेहतर है। डॉक्टर के बताए समय के अनुसार चलें।
आमतौर पर तीन से छह महीने तक चलती है। पाटिप्पात की गंभीरता के हिसाब से डॉक्टर समय तय करते हैं।
इस दवाई के फायदे
ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती है। लकवे के बाद एक वाक्य पूरा करने में वक्त लगता है, शब्द खुद नहीं आते। सिटिकोलिन और पिरासेटम इस प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं।
याददाश्त धीरे-धीरे लौटती है। कल क्या हुआ भूल जाना कम होता है। रोज़मर्रा के काम खुद करने की क्षमता बेहतर होती है।
मानसिक उदासी भी कम हो सकती है। लकवे के बाद शारीरिक तकलीफ के साथ-साथ मानसिक अवसाद भी आता है। दिमाग को ऊर्जा मिलने से मन कुछ हद तक साफ होता है।
किन बातों का ध्यान रखें?
खून पतला करने वाली दवाइयाँ ले रहे हों तो डॉक्टर को ज़रूर बताएं। पिरासेटम खून जमने की क्षमता पर थोड़ा असर कर सकती है।
दिमाग में रक्तस्राव हो तो यह दवाई नहीं दी जाती। खून का बहाव बढ़ाना उस स्थिति में खतरनाक होगा।
ऑपरेशन होने वाला हो तो पहले डॉक्टर को बताएं।
साइड इफेक्ट्स
नींद न आना सबसे आम साइड इफेक्ट है। दिमाग सक्रिय हो जाता है इसलिए रात को नींद आने में देर लग सकती है। समय ठीक करने पर यह कम होता है।
हल्का पेट दर्द या दस्त हो सकते हैं। कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर में हल्का बदलाव हो सकता है। शुरुआत में थोड़ी घबराहट हो सकती है, आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक होती है।
किन्हें यह नहीं लेनी चाहिए?
गंभीर किडनी की विफलता वालों को पिरासेटम बाहर निकालने में दिक्कत होगी। दिमाग में रक्तस्राव हो तो नहीं दी जाती। Huntington's Chorea नाम की तंत्रिका बीमारी वालों को भी नहीं दी जाती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह दिमाग तेज़ करने का टॉनिक है?
नहीं। यह गंभीर मेडिकल स्थितियों की दवाई है। परीक्षा में पढ़ाई आसान होगी सोचकर लेना ठीक नहीं। डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
क्या इसकी लत लग जाती है?
नहीं। यह नशे की दवाई नहीं है। डॉक्टर के बताए समय पर बंद की जा सकती है।
कितने दिनों में असर दिखेगा?
लकवे की रिकवरी धीमी प्रक्रिया है। कुछ हफ्तों में छोटे-छोटे बदलाव दिख सकते हैं। पूरा असर आने में महीने लग सकते हैं।
अंत में
सेखर अपने पोते को कहानी सुना रहे हैं — यह सिर्फ दवाई की वजह से नहीं हुआ। शारीरिक कसरत, स्पीच थेरेपी, परिवार का साथ, डॉक्टर की निगरानी — यह सब मिलकर हुआ।
सिटिकोलिन और पिरासेटम उस रिकवरी के सफर में एक ज़रूरी सहारा है। दिमाग को पोषण देता है, कोशिकाओं की रक्षा करता है, नए संबंध बनाने में मदद करता है। दवाई के साथ दिमाग को सक्रिय रखना, नई चीज़ें सीखना, शरीर को स्वस्थ रखना — यह सब मिले तो दिमाग अपनी ताकत वापस पा सकता है।
References: https://medlineplus.gov/stroke.html https://medlineplus.gov/strokerehabilitation.html https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4061873/ https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10425702/

