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Antioxidant Multivitamin Multimineral tablet uses in Hindi | शरीर के अंदर चल रही खामोश जंग: एंटी-ऑक्सीडेंट, मल्टीविटामिन, मल्टीमिनरल कॉम्बिनेशन की पूरी जानकारी

19 June 2026

Antioxidant Multivitamin Multimineral tablet uses in Hindi | शरीर के अंदर चल रही खामोश जंग: एंटी-ऑक्सीडेंट, मल्टीविटामिन, मल्टीमिनरल कॉम्बिनेशन की पूरी जानकारी

Antioxidant Multivitamin Multimineral tablet uses in Hindi | शरीर के अंदर चल रही खामोश जंग: एंटी-ऑक्सीडेंट, मल्टीविटामिन, मल्टीमिनरल कॉम्बिनेशन की पूरी जानकारी

एक दिन सुबह आईने के सामने खड़े होकर देखिए। पैंतीस साल की उम्र में पैंतालीस साल के दिखते हैं क्या? त्वचा बेजान लगती है? हमेशा थकान महसूस होती है? बार-बार सर्दी-जुकाम हो जाता है?

ये सब अलग-अलग समस्याएं लग सकती हैं। लेकिन इन सबके पीछे एक सामान्य वजह हो सकती है — शरीर में फ्री रेडिकल्स (Free Radicals) नाम के विषैले मॉलिक्यूल बढ़ जाते हैं, और कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती जाती हैं।

हम जो हवा सांस में लेते हैं उसमें प्रदूषण है। जो खाना खाते हैं उसमें पोषक तत्व पर्याप्त नहीं हैं। तनाव है। ये सब मिलकर शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) नाम की स्थिति पैदा करते हैं। इस हालत में एंटी-ऑक्सीडेंट, मल्टीविटामिन, मल्टीमिनरल कॉम्बिनेशन टैबलेट एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है।

फ्री रेडिकल्स क्या होते हैं? ये खतरनाक क्यों हैं?

इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लेते हैं। लोहे के एक टुकड़े को हवा में रखें तो उसमें जंग लग जाती है। ऑक्सीजन लोहे के साथ क्रिया करके उसे नुकसान पहुंचाती है। इसे ऑक्सीडेशन (Oxidation) कहते हैं।

हमारे शरीर में भी ऐसा ही होता है। हर मिनट शरीर में हजारों रासायनिक प्रक्रियाएं होती हैं। इन प्रक्रियाओं में फ्री रेडिकल्स नाम के अणु बनते हैं। इनमें एक इलेक्ट्रॉन की कमी होती है। उस कमी को पूरा करने के लिए ये पास की स्वस्थ कोशिकाओं से इलेक्ट्रॉन चुरा लेते हैं।

जिस कोशिका से चोरी हुई, वह भी अब फ्री रेडिकल बन जाती है। वह किसी और कोशिका से चुराती है। इस तरह एक श्रृंखला बनकर नुकसान फैलता जाता है। DNA को नुकसान पहुंचता है, कोशिका की दीवारें कमजोर होती हैं, रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं।

वायु प्रदूषण, धुआं, तनाव, विकिरण, प्रोसेस्ड फूड — ये सब फ्री रेडिकल्स के उत्पादन को बढ़ाते हैं। आज की जीवनशैली में इनसे बचना मुश्किल है। इसीलिए शरीर को लगातार एंटी-ऑक्सीडेंट सुरक्षा की जरूरत होती है।

ये तीनों मिलकर क्या करते हैं?

एंटी-ऑक्सीडेंट्स — फ्री रेडिकल्स के शिकारी

एंटी-ऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स को अपना इलेक्ट्रॉन दान कर देते हैं। इससे फ्री रेडिकल पूरा हो जाता है, और अगली कोशिका पर हमला नहीं करता। एंटी-ऑक्सीडेंट दान देने के बाद भी स्थिर रहता है, यानी श्रृंखला यहीं रुक जाती है।

लाइकोपीन (Lycopene) टमाटर में पाया जाने वाला लाल रंग का एंटी-ऑक्सीडेंट है। यह प्रोस्टेट और दिल की सुरक्षा के लिए बेहतरीन है। बीटा-कैरोटीन (Beta-Carotene) गाजर में पाया जाने वाला एंटी-ऑक्सीडेंट है, जो आंखों की सेहत के लिए जरूरी है। विटामिन C और विटामिन E बहुत शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट्स हैं। ये सब एक ही टैबलेट में मिल जाएं तो कई परतों की सुरक्षा मिल जाती है।

मल्टीविटामिन्स — शरीर की पोषण नींव

विटामिन A आंखों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है। B कॉम्प्लेक्स ग्रुप के विटामिन ऊर्जा उत्पादन और नसों की सेहत के लिए आवश्यक हैं। विटामिन C कोलाजन बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है। विटामिन D हड्डियों की सेहत और इम्युनिटी के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन K रक्त के जमने के लिए जरूरी है।

हर विटामिन का अपना काम है। ये सब साथ मिलें तो शरीर का पूरा कामकाज सुचारू रहता है।

मल्टीमिनरल्स — एंजाइम्स का टूलबॉक्स

जिंक रोग प्रतिरोधक क्षमता का मुख्य खनिज है। सेलेनियम ग्लूटाथिओन पेरोक्सिडेज़ (Glutathione Peroxidase) नाम के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट एंजाइम के लिए जरूरी है। कॉपर और मैंगनीज़ SOD यानी सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज (Superoxide Dismutase) एंजाइम के काम करने के लिए आवश्यक हैं। क्रोमियम ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है।

ये खनिज न हों तो एंजाइम्स सही ढंग से काम नहीं करते। एंजाइम्स ठीक न हों तो शरीर की रासायनिक प्रक्रियाएं बाधित हो जाती हैं।

शरीर के अंदर क्या होता है?

जब फ्री रेडिकल किसी कोशिका पर हमला करता है, तो एंटी-ऑक्सीडेंट तुरंत आकर उसे निष्क्रिय कर देता है। यह पहली रक्षा पंक्ति है।

दूसरी रक्षा पंक्ति है शरीर के अपने एंजाइम्स। SOD, कैटालेज़ (Catalase), ग्लूटाथिओन पेरोक्सिडेज़ जैसे एंजाइम कोशिकाओं के अंदर प्राकृतिक रूप से फ्री रेडिकल्स को नष्ट करते हैं। इन एंजाइम्स को काम करने के लिए जिंक, सेलेनियम, कॉपर जैसे खनिज चाहिए होते हैं। मल्टीमिनरल इन खनिजों की कमी पूरी करता है।

तीसरी रक्षा पंक्ति है DNA की मरम्मत। कुछ कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो भी जाएं, तो DNA को ठीक करने वाले एंजाइम मौजूद होते हैं। इस मरम्मत के लिए B विटामिन और फोलेट जरूरी हैं। मल्टीविटामिन यह प्रदान करता है।

इस तरह तीन परतों की सुरक्षा एक साथ काम करती है।

यह टैबलेट किसके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है?

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों के लिए

चेन्नई में काम करने वाली 38 साल की मालती को हर महीने कम से कम एक बार सर्दी-जुकाम हो जाता था। यह सिलसिला लगातार चलता रहा। इम्यूनोलॉजिस्ट के पास गईं। व्हाइट ब्लड सेल काउंट सही था। लेकिन जिंक और सेलेनियम कम था। एंटीऑक्सीडेंट मल्टीविटामिन मल्टीमिनरल कॉम्बिनेशन टैबलेट शुरू की। तीन महीनों में सर्दी-जुकाम होने की फ्रीक्वेंसी काफी कम हो गई।

जिंक रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं के निर्माण और कार्यक्षमता के लिए जरूरी है। जिंक कम हो तो T-Cells और Natural Killer Cells सही ढंग से काम नहीं करतीं।

लगातार थकान महसूस करने वालों के लिए

पर्याप्त नींद और खाना लेने के बावजूद थकान बनी रहती है? इसकी कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन पोषक तत्वों की कमी भी एक मुख्य कारण है। B विटामिन ऊर्जा उत्पादन के लिए जरूरी हैं। ये कम हों तो खाने में मौजूद ऊर्जा ATP में नहीं बदल पाती। शरीर थका हुआ महसूस करता है।

एंटी-एजिंग फायदे के लिए

कोलाजन त्वचा की जवानी बनाए रखने वाला प्रोटीन है। इसे बनाने के लिए विटामिन C जरूरी है। फ्री रेडिकल्स कोलाजन को नुकसान पहुंचाते हैं। एंटी-ऑक्सीडेंट्स उस नुकसान को रोकते हैं। दोनों साथ हों तो त्वचा की जवानी लंबे समय तक बनी रहती है।

लाइकोपीन खासतौर पर त्वचा को सूरज की किरणों से बचाता है। UV किरणें त्वचा में फ्री रेडिकल्स बनाती हैं। लाइकोपीन इसे रोकता है।

बालों के झड़ने में भी जिंक और सेलेनियम महत्वपूर्ण हैं। ये बालों की जड़ों को मजबूत बनाकर समय से पहले सफेद होने और बाल झड़ने को नियंत्रित करते हैं।

डायबिटीज के मरीजों के लिए

डायबिटीज में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बहुत ज्यादा होता है। ज्यादा शुगर लेवल फ्री रेडिकल्स के उत्पादन को कई गुना बढ़ा देता है। यह नसों, आंखों, और किडनी को नुकसान पहुंचाता है।

एंटी-ऑक्सीडेंट्स इस नुकसान को कम करते हैं। क्रोमियम ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है। सेलेनियम पैंक्रियास की रक्षा करता है।

सही तरीके से लेना चाहिए

दोपहर के खाने के बाद लेना सबसे अच्छा रहता है। क्योंकि इस टैबलेट में वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) होते हैं। इन्हें अवशोषित होने के लिए खाने में थोड़ी वसा चाहिए होती है।

टैबलेट को पूरा निगल लें। तोड़ें नहीं, चबाएं नहीं। कुछ एंटी-ऑक्सीडेंट्स पर खास कोटिंग होती है, तोड़ने पर फायदा कम हो जाता है।

एंटासिड दवाओं के साथ न लें। आंत में एसिड कम हो तो कुछ खनिज अवशोषित नहीं होते। कम से कम एक घंटे का अंतर रखें।

वारफारिन (Warfarin) जैसी ब्लड थिनर दवाएं लेने वालों को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस टैबलेट में विटामिन K होता है। विटामिन K वारफारिन के असर को कम कर देता है। INR का स्तर बदल सकता है। डॉक्टर को जरूर बताएं।

एंटीबायोटिक लेने वालों को भी अंतराल चाहिए। खासकर फ्लोरोक्विनोलोन वर्ग की एंटीबायोटिक्स के साथ इस टैबलेट में मौजूद कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम मिल जाएं तो एंटीबायोटिक अवशोषित नहीं हो पाती।

ज्यादा मात्रा में लेने पर क्या होगा?

बहुत लोग एक गलती करते हैं — एक साथ दो अलग-अलग मल्टीविटामिन टैबलेट लेना। "एक खाने से इतना फायदा है, तो दो खाने से दोगुना फायदा होगा" ऐसा सोचते हैं। यह बिल्कुल गलत सोच है।

विटामिन A वसा में घुलता है, शरीर में जमा होता है। ज्यादा हो जाए तो लिवर प्रभावित होता है। विटामिन D ज्यादा हो जाए तो कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है, किडनी स्टोन हो सकता है। आयरन ज्यादा हो जाए तो आंत और लिवर प्रभावित होते हैं।

इसलिए सिर्फ एक टैबलेट। डॉक्टर द्वारा बताई गई अवधि तक ही।

किसे सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

किडनी की बीमारी वालों में विटामिन A, D, और कैल्शियम किडनी में जमा हो सकते हैं। डॉक्टर से पूछकर मात्रा तय करनी चाहिए।

हीमोक्रोमैटोसिस (Hemochromatosis) नाम की बीमारी, जिसमें शरीर में आयरन ज्यादा जमा हो जाता है, उन लोगों को आयरन वाला मल्टीविटामिन बिल्कुल नहीं लेना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं को सामान्य मल्टीविटामिन नहीं लेना चाहिए। उनके लिए प्रीनेटल विटामिन्स (Prenatal Vitamins) नाम का अलग प्रकार होता है। ज्यादा मात्रा में विटामिन A गर्भ के लिए खतरनाक होता है। प्रसूति विशेषज्ञ की सलाह से ही लें।

खाने से ही एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जा सकते हैं

अनार, आंवला, पपीता, अमरूद — इनमें विटामिन C भरपूर होता है। गाजर, पत्तागोभी से बीटा-कैरोटीन मिलता है। एक दिलचस्प बात यह है कि टमाटर को पकाने पर लाइकोपीन ज्यादा असरदार रूप में मिलता है। कच्चे टमाटर के मुकाबले पके हुए टमाटर में लाइकोपीन का अवशोषण बेहतर होता है।

अखरोट, बादाम, तिल — इनसे सेलेनियम और विटामिन E मिलता है। इन खाद्य पदार्थों को रोज शामिल करें तो टैबलेट की जरूरत कम हो जाती है।

लेकिन आज की जीवनशैली में इतना खाना खाने का समय नहीं मिल पाता, यह भी सच है। उस स्थिति में टैबलेट एक अतिरिक्त सुरक्षा का काम कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या जीवनभर ले सकते हैं? नहीं लेना चाहिए। पोषक तत्वों की कमी दूर होने तक, यानी एक से तीन महीने तक। उसके बाद प्राकृतिक खाने पर वापस जाएं। अगर लगातार लेना है, तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

वजन बढ़ेगा? सीधे तौर पर नहीं बढ़ेगा। लेकिन मेटाबॉलिज्म सही होने पर भूख ठीक से लगने लगती है। खाने की मात्रा का ध्यान रखें तो कोई समस्या नहीं।

क्या एंटी-ऑक्सीडेंट्स खाने से ही मिल सकते हैं? हां। रंग-बिरंगे फल, सब्जियां और मेवे रोज खाएं तो टैबलेट की जरूरत ही न पड़े। टैबलेट सिर्फ एक सहायक है, खाने का विकल्प नहीं है।

अंत में एक सोचने वाली बात

हम अपनी गाड़ी का ध्यान रखते हैं। सर्विस करवाते हैं, तेल बदलवाते हैं। लेकिन क्या शरीर को भी उतना ही ध्यान देते हैं?

शरीर के अंदर हर दिन एक जंग चल रही है। फ्री रेडिकल्स हमला करते हैं, एंटी-ऑक्सीडेंट्स उन्हें रोकते हैं। इस जंग में अच्छी सेना को जरूरी हथियार — विटामिन, खनिज, एंटी-ऑक्सीडेंट्स — सही समय पर देना हमारी जिम्मेदारी है।

डॉक्टर की सलाह से, सही मात्रा में, सिर्फ निश्चित समय तक लें। खानपान सुधारें, व्यायाम जोड़ें। टैबलेट सिर्फ एक अतिरिक्त सहारा है। लेकिन सही समय पर मिला वह सहारा शरीर को मजबूत बना सकता है।

References:

https://ods.od.nih.gov/factsheets/MVMS-HealthProfessional/

https://ods.od.nih.gov/factsheets/VitaminC-HealthProfessional/

https://ods.od.nih.gov/factsheets/Zinc-HealthProfessional/

https://ods.od.nih.gov/factsheets/ImmuneFunction-HealthProfessional/